नई श्रम संहिता के तहत 40+ श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल शुरू

Wed 06-May-2026,05:48 PM IST +05:30

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नई श्रम संहिता के तहत 40+ श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल शुरू Annual-Health-Check-Workers-India-Labour-Code
  • नई श्रम संहिता के तहत 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य, देशभर में 7 मई से शुरुआत।

  • ईएसआईसी अस्पतालों के नेटवर्क के जरिए श्रमिकों को निवारक स्वास्थ्य सेवाएं और शीघ्र निदान की सुविधा मिलेगी।

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित श्रमिकों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया इस पहल का औपचारिक उद्घाटन ESIC Medical College and Hospital में करेंगे। इसके साथ ही देशभर के 11 अन्य ईएसआईसी अस्पतालों में भी इस कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘श्रमेव जयते’ दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें श्रमिकों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

नई श्रम संहिता के तहत 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समाहित किया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना, रोजगार को औपचारिक रूप देना और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना है।

विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है। इसके तहत एक सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना और ईएसआईसी लाभों का विस्तार किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए हर साल स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी। यह जांच ईएसआईसी के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से की जाएगी, जिसमें शीघ्र निदान और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इसके अलावा, खतरनाक कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए उम्र की परवाह किए बिना नियमित चिकित्सा जांच अनिवार्य की गई है। इसमें रसायनों, विषैले पदार्थों और भारी मशीनरी के साथ काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं।

इस पहल के तहत श्रमिकों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का व्यवस्थित रखरखाव और समय-समय पर निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल श्रमिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा, बल्कि कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगा।